Shani Chalisa
Friday, April 17, 2026
॥ श्री शनि चालीसा ॥
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
चौपाई
जयति जयति शनिदेव दयाला।
करहु कृपा ममता सुरशाला॥
जयति जयति सूर्यसुत तुम स्वामी।
लोक विख्यात नाम के धामी॥
तुम्हरो नाम जपत जो कोई।
ताहि अमंगल कबहुं न होई॥
ग्रह नक्षत्र तारक सब डरे।
यम को भी भय तुम्हारे भरे॥
तुम्हरो प्रभाव अति सब जानै।
तृण के व्रक्ष महा फल पानै॥
राजा होय रंक बनाया।
रंक से धनवान बनाया॥
जो गुण रहित भक्ति करो कोई।
शनि कृपा निश्चय ही होई॥
धरती पर तो भय सतावे।
पाताल में भी चैन न पावे॥
कपट में करो कृपा तुम्हारी।
निष्कपट होय, देह सुख भारी॥
श्रवन सुनी शनि कृपा बखानी।
कपट न होय, मिले सुख सानी॥
शरण पडे़ जो तुम्हरी आए।
सकल कामना सुफल पाए॥
जनम जन्म संताप मिटाओ।
सुख के सागर में विलाओ॥
जो यह शनि चालीसा गावै।
सकल कष्ट दूर हो जावै॥
अर्थहीन जो पाठ करे।
अर्थी सुख सुफल वह भरे॥
जयति जयति शनि देव कहे।
अयोध्यादास की अरज सहे॥
दोहा
कहत अयोध्यादास प्रभु, सुनहु शनि देव तुम जान।
करहु कृपा हे सूर्य सुत, हरो सकल संकट महान॥